पेड़ों पे कुरेदे नाम

ज़िक्र आते ही किसी दीवाने का महफ़िल में
तेरी आँखों ने मुझे झट से गिराया होगा

बीती बातों को, अपने किस्सों को
बात ज़ाहिर सी है तूने सबसे छिपाया होगा

चाँद बनकर जो उतरा था इक रोज़ मेरे घर में
उसी हबीब ने मेरा घर भी जलाया होगा

बात अलहदा है झूठी कसमों की तो ‘साहिल’
पेड़ों पे कुरेदे नामों को कैसे झुठलाया होगा

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