सूखे फूलों में छिपी बचपन की यादें

आज खोली क़िताब इक मैंने जो मेरे बचपन की, सूखे फूलों को देख के खिल गईं यादें बचपन की, भूले

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पेड़ों पे कुरेदे नाम

ज़िक्र आते ही किसी दीवाने का महफ़िल में तेरी आँखों ने मुझे झट से गिराया होगा बीती बातों को, अपने

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